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दिव्यांगों के लिए सुगम्य यात्रा की पहल बिना बाधा के धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच पर जोर।

  • Writer: MimTimes मिम टाइम्स  م ٹائمز
    MimTimes मिम टाइम्स م ٹائمز
  • Feb 13, 2025
  • 2 min read

13 February 2025


मुंबई,दिव्यांग व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने और उन्हें समावेशी गतिशीलता का अधिकार दिलाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा "संगमने यात्रा" की शुरुआत की गई। यह यात्रा 7 फरवरी  से 11 फरवरी तक आयोजित की गई, जिसमें दिव्यांग व्यक्तियों को धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर बिना किसी बाधा के यात्रा करने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाया गया।

इस अभियान के तहत दिव्यांग व्यक्तियों को सरकारी भवनों, धार्मिक स्थलों, पर्यटन स्थलों और मनोरंजन केंद्रों तक सुगम यात्रा प्रदान करने के लिए "Yes to Access" ऐप का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। 7 फरवरी  को मुंबई के हाजी अली क्षेत्र से इस यात्रा को दिव्यांग कल्याण आयुक्तालय, महाराष्ट्र राज्य, पुणे और सहायक आयुक्त, समाज कल्याण, मुंबई शहर के संयुक्त तत्वावधान में हरी झंडी दिखाई गई।

इस अभियान के तहत केंद्र और राज्य सरकार की ओर से 10 फरवरी को मुंबई के धर्मादाय आयुक्त कार्यालय, सरकारी दफ्तरों और नेहरू तारांगण में दिव्यांग व्यक्तियों की सुविधाओं को लेकर धर्मादाय आयुक्त के प्रादेशिक उपायुक्त वैभव जाधव और जनसंपर्क अधिकारी प्रल्हाद कोकाटे के साथ चर्चा की गई।


इसके अलावा, 11 फरवरी  को सिद्धिविनायक मंदिर के कार्यकारी अधिकारी वीणा पाटील और ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों के साथ बैठक की गई, जिसमें दिव्यांग व्यक्तियों की सुगम्य यात्रा सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। इसके पश्चात, चैत्यभूमि का भी दौरा किया गया।

इस सुगम्य यात्रा में दिव्यांग कल्याण आयुक्तालय, महाराष्ट्र राज्य, पुणे, सहायक आयुक्त, समाज कल्याण, मुंबई शहर कार्यालय, जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र, माहीम, राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांग जनशक्तीकरण संस्थान (क्षेत्रीय केंद्र, नवी मुंबई), अली यावर जंग नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पीच एंड हियरिंग डिसेबिलिटी (बांद्रा), सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता, सिद्धिविनायक ट्रस्ट के पदाधिकारी और चैत्यभूमि से जुड़े संस्थानों सहित कई सरकारी और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया।

इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को स्वतंत्र और सुविधाजनक यात्रा का अधिकार दिलाना था, जिससे वे बिना किसी बाधा के समाज का अभिन्न हिस्सा बन सकें।

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