महाविकास अघाड़ी में फूट: अबू आज़मी ने शपथ ग्रहण कर उद्धव ठाकरे पर साधा निशाना, अघाड़ी से अलग होने का ऐलान
- MimTimes मिम टाइम्स م ٹائمز

- Dec 8, 2024
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8 December 2024
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। विधानसभा चुनावों में महाविकास अघाड़ी की हार के बाद समाजवादी पार्टी ने गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले ने विपक्ष को एक बड़ा झटका दिया है। जहां विपक्षी नेताओं ने ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाकर शपथ ग्रहण से दूर रहने का निर्णय लिया, वहीं समाजवादी पार्टी के नेता और विधायक अबू आज़मी ने विधानसभा पहुंचकर शपथ ली।
अबू आज़मी ने महाविकास अघाड़ी के नेतृत्व, खासकर उद्धव ठाकरे, पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा, "चुनाव में हार के बाद शिवसेना ने अपनी विचारधारा बदल ली है। उद्धव ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं को हिंदुत्व के मुद्दे पर काम करने को कहा, लेकिन सभी धर्मों को साथ लेकर चलने की बात नहीं की। 6 दिसंबर बाबरी शहादत की तारीख है, जिसे लेकर हम लंबे समय से चुप रहे हैं। पर हमारे घाव बार-बार हरे किए जा रहे हैं। ऐसे लोगों के साथ मैं आगे नहीं रह सकता।"
गठबंधन से अलग होने के कारण
अबू आज़मी ने स्पष्ट किया कि वे महाविकास अघाड़ी का हिस्सा नहीं रह सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि गठबंधन में उनकी पार्टी के मुद्दों की अनदेखी की गई। अबू आज़मी ने यह भी कहा कि वे जल्द ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलकर महाराष्ट्र में गठबंधन की नई रणनीति पर चर्चा करेंगे।
राजनीतिक मुलाकात ने बढ़ाई अटकलें
दस दिन पहले अबू आज़मी की अजित पवार के साथ 'देवगिरी' सरकारी बंगले पर मुलाकात ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी थी। हालांकि, उस समय अबू आज़मी ने दावा किया था कि यह मुलाकात राष्ट्रवादी कांग्रेस के एक प्रत्याशी द्वारा लगाए गए आरोपों पर चर्चा के लिए थी।
समाजवादी पार्टी के विधायक और उनका भविष्य
महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के पास दो विधायक हैं। भिवंडी पूर्व से रईस शेख और मानखुर्द-शिवाजी नगर से अबू आज़मी। अबू आज़मी चौथी बार अपने पारंपरिक क्षेत्र से जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। वहीं, रईस शेख उद्धव ठाकरे के करीबी माने जाते हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि रईस शेख इस राजनीतिक बदलाव पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और समाजवादी पार्टी की आगे की रणनीति क्या होगी।
महाविकास अघाड़ी पर असर
महाविकास अघाड़ी पहले से ही चुनावी हार और आंतरिक असहमति से जूझ रही थी। अब समाजवादी पार्टी के अलग होने से गठबंधन की स्थिति और कमजोर हो गई है। एनसीपी और कांग्रेस ने इस मामले पर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन अबू आज़मी के इस फैसले ने गठबंधन में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या अब महाविकास अघाड़ी का अस्तित्व खतरे में है?
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस और एनसीपी इस परिस्थिति को कैसे संभालते हैं और क्या यह दरार गठबंधन के लिए स्थायी साबित होगी।









